ब्रह्मस्थान ऊर्जा का सबसे अहम स्थान - पिरामिड वास्तु

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  • ज्योतिष विज्ञान
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  • 17 December 2025
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आचार्य मनीष खुराना ( वास्तु ऋषि )-

किसी भी भवन में उस भवन के केंद्र में ऊर्जा का सबसे अधिक संग्रह होता है । वास्तु के अनुसार हमें सिर्फ चार मुख्य दिशाओं पर ही नहीं बल्कि दसों दिशाओं पर मुख्य रूप से ध्यान देना आवश्यक है । जिनमें चार मुख्य दिशाएं उत्तर , पूर्व , दक्षिण , पश्चिम एवं चार उपदिशाएं ईशान , आग्नेय ,नेऋत्य , वायव्य होती हैं । और बाकि की दो दिशाएँ हैं - आकाश एवं पाताल !!! इन सभी दसों दिशाओं का किसी भी भवन में मुख्य मिलन उस भवन के केंद्र में होता है । जिसे हम ब्रह्मा जी का स्थान एवं ब्रह्मस्थान के रूप में भी जानते हैं । यह वह स्थान है जो कि वास्तुशास्त्र में किसी भी भवन के वास्तु मूल्यांकन में सर्वोपरि है । किसी भवन में अगर एक से अधिक वास्तुदोष हों तो केवल केंद्र में उचित ऊर्जा के प्रवाह से ही समस्त वास्तुदोषों का निवारण संभव है । और अगर किसी भवन में सभी दिशाएं वास्तु सम्मत हैं लेकिन सिर्फ केंद्र वास्तु दोष युक्त है तो अब पूरे भवन का ही वास्तु शुभ फल देने वाला न होगा । अतः अपने भवन के केंद्र अर्थात् ब्रह्मस्थान को वास्तुदोष मुक्त करने हेतु निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें : 

किसी भी भवन का ब्रह्मस्थान खुला , खाली, हवादार एवं रौशनी युक्त होना चाहिए । 

ब्रह्मस्थान पर किसी भी तरह का कोई भी निर्माण न किया जाये । 

यह स्थल आपके भवन के बाकी किसी भी स्थल से ऊंचा या नीचा नहीं होना चाहिए । 

भूमि क स्थल की ऊपरी सतह क साथ साथ भूमि के अंदर कम से कम भूमि के स्वामी की ऊंचाई के जितनी गहराई तक्क किसी भी प्रकार का कोई अवशेष , लोहा, कूड़ा , कचरा या अन्य कोई नकारात्मक पदार्थ नहीं होना चाहिए । 

अब आप सोच रहे होंगे की आज के इस आधुनिक निर्माण में जहाँ पर अधिकतर लोगों को फ्लैट्स में ही रहना पड़ता है वे लोग इस विषय पर कैसे गौर करें । 

संयम रखें घबराईये मत ! पिरामिड वास्तु के द्वारा किसी भी भवन की आत्मीय ऊर्जा पर वैज्ञानिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार किया जाता है । जिससे की केंद्र में कॉस्मिक ऊर्जा द्वारा समस्त वास्तुदोषों का निवारण कर सुख-समृद्धि को सरलता से पाया जा सकता है । इस केंद्र ऊर्जित विधि को ब्रह्मस्थान का जागृत करना या भूमि जागृत करना भी कहा जाता है । इस विधि में भूमि के वास्तु के लिए केंद्र में नौ पिरामिड दबाये जातें हैं । जिसके द्वारा चार दिशाएं , चार उपदिशाएं और आकाश एवं पाताल दसों दिशाओं को एक साथ वास्तु सम्मत किया जाता है । एवं फ्लैट्स में केंद्र स्थान के ऊपर यानि की छत पर अधिक ऊर्जा का एक ही पिरामिड लगा कर वास्तु दोषों से मुक्ति पा कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है । पिरामिड यन्त्र का असली होना अति आवश्यक है । केवल जितेन पिरामिड ही इस्तेमाल करें । आशा है इस लेख से आप के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का एक नया द्वार खुलेगा ।                                                                                                       

                                                                                                                               



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