तंत्र कोई धर्म नहीं है, बल्कि शुद्ध विज्ञान है। इसमें किसी प्रकार की अंधश्रद्धा या केवल विश्वास की आवश्यकता नहीं होती...
गुरु और शिष्य के बीच "एकात्म-बोध" का अनुभव कैसे होगा? क्या हमें इस विषय पर विचार करना चाहिए या नहीं?...
इन्द्र ने कार्त्तिकेय से कहा कि वह ब्रह्मा से सलाह कर वर्ष आरम्भ का पुनः निर्धारण करें।...
किन्तु वेद की पूर्णता ब्रह्म कि समझने में है, जिसे भागवत तत्त्व कहा गया है।...
यह किसी एक व्यक्ति का मत नहीं है, अनेक ऋषियों के ज्ञान का संग्रह है।...
ध्वज प्रगति और गति का प्रतीक होता है। वह ऊँचाई पर होता है और दूर से दिखाई देता है। उसी...
नारद पुराण में भी सत्य, त्रेता, द्वापर एवं कलियुग की क्रमश: कार्तिक शुक्ल नवमी, वैशाख शुक्ल तृतीया, माघी अमावस्या एवं...
भारत में भी व्यक्तिवादी सम्प्रदायों ने सनातन की निन्दा की है, पर उसी ज्ञान को थोड़े शब्द बदल कर अपना...
असुरों ने भी समय समय पर अपने स्वार्थ या वासना पूर्ति के लिए वेद शब्दों के भिन्न अर्थ किये, जैसे...
सनातन धर्म में नास्तिक उसे कहते हैं जो कहता है, न अन्यत् अस्ति = जो मैं कहता हूं वही सही...