केन्द्र–त्रिकोण का सिद्धान्त ज्योतिषशास्त्र का ऐसा आधार है जिस पर समस्त योग-सिद्धान्त, राजयोग, लक्ष्मीनारायण योग, धर्म–कर्माधिपति योग तथा अनेक चर-स्थावर,...
गीता में पहले महर्षियों तथा मनु आदि से सृष्टि का आरम्भ कहा है तथा विभिन्न प्रकार की सृष्टियों में सर्वश्रेष्ठ...
धर्म में बताए गए ऐसे पारंपरिक कृत्यों के पीछे के अध्यात्मशास्त्र को समझ लिया जाए, तो उनका महत्त्व हमें स्पष्ट...
मनुष्य का अनुकरण करने वाले पशु को भी कपि कहते हैं। तेज का स्रोत विष्णु है, उसका अनुभव शिव है...
प्रतिदिन अग्निहोत्र करना केवल आपातकाल की दृष्टि से ही नहीं, अपितु सामान्य जीवन में भी अत्यंत लाभकारी है।...
चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है।...
अग्नि का पुनः ज्वलन-सम्वत्सर रूपी अग्नि वर्ष के अन्त में खर्च हो जाती है, अतः उसे पुनः जलाते हैं, जो...
होलिका दहन के समय अग्निदेवता का तत्त्व वहाँ सक्रिय रहता है और यह तत्त्व दूसरे दिन भी कार्यरत रहता है।...
यह मंत्र साधक को ऊर्ध्वगामी बनाता है, शान्ति और चिदानन्द की स्थिति तक ले जाता है।...
हम सबकी यात्रा उसी अनंत की ओर है— उसी देवालय की ओर। और उस पथ पर आरंभ में *मंदिर* भी...