जब विज्ञान और ज्योतिष मिलते हैं: क्वांटम टनलिंग का आध्यात्मिक रहस्य

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  • ज्योतिष विज्ञान
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  • 07 December 2025
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श्री शशांक शेखर 'शुल्ब' (ज्योतिर्विद)-

✓•१. प्रस्तावना: ज्योतिष प्राचीन भारतीय दार्शनिक-वैज्ञानिक परंपरा में सूक्ष्म कारण–सूत्रों पर आधारित एक ज्ञान-प्रणाली है। इसका मूल कथन है कि दृश्यमान भौतिक घटनाएँ अदृश्य, सूक्ष्म एवं कारणगत ऊर्जा-प्रवाहों से प्रभावित होती हैं। आधुनिक भौतिकी में क्वांटम यांत्रिकी, विशेषतः क्वांटम टनलिंग (Quantum Tunnelling), यह सिद्ध करता है कि सूक्ष्म स्तर पर पदार्थ के व्यवहार की सीमाएँ हमारी स्थूल-भौतिक समझ से परे होती हैं।

 

•क्वांटम टनलिंग बताता है कि कोई कण ऐसे अवरोध को भी पार कर सकता है, जिसे पार करना शास्त्रीय (classical) भौतिकी के अनुसार असंभव है। यह घटना अनुमान, संभाव्यता, ऊर्जा-स्तर, और सूक्ष्म-अंतरक्रिया पर आधारित है।

 

•ज्योतिष भी कहता है कि जीवन की घटनाएँ स्थूल सीमाओं से बँधकर नहीं चलतीं; अनेक बार सूक्ष्म कर्म, दशाएँ, गोचर, नक्षत्रीय ऊर्जा आदि “असंभावित” घटनाओं को भी संभव बना देते हैं। यह सूक्ष्म-स्थूल अंतःक्रिया वही है जिसे आधुनिक विज्ञान क्वांटम घटनाओं के रूप में देखता है।

 

यह शोधप्रबंध क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष के बीच संबंध का विश्लेषण करता है और दर्शाता है कि कैसे वैदिक शास्त्रों में वर्णित सूक्ष्म-गति, गुण-परिवर्तन, कर्म-सूत्र तथा ब्रह्माण्ड-व्यवस्था आधुनिक क्वांटम सिद्धांतों के अनुरूप है।

 

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✓•२. ज्योतिष का शास्त्रीय आधार: सूक्ष्म-ऊर्जा और अदृष्ट के सिद्धांत:

 

✓•२.१ ऋत और कर्म-सूत्र

"ऋ॒तं च॑ स॒त्यं चा॒भी॑द्धा॒त्तप॒सोऽध्य॑जायत । 

ततो॒ रात्र्य॑जायत॒ तत॑: समु॒द्रो अ॑र्ण॒वः ॥

स॒मु॒द्राद॑र्ण॒वादधि॑ संवत्स॒रो अ॑जायत ।

 अ॒हो॒रा॒त्राणि॑ वि॒दध॒द्विश्व॑स्य मिष॒तो व॒शी ॥

सू॒र्या॒च॒न्द्र॒मसौ॑ धा॒ता य॑थापू॒र्वम॑कल्पयत् । 

दिवं॑ च पृथि॒वीं चा॒न्तरि॑क्ष॒मथो॒ स्व॑: ॥"

 

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     ऋग्वेद (१०.१९०.१–३) में ऋत को ब्रह्माण्ड का अचूक नियम कहा गया है। यह नियम सूक्ष्म कारणों से स्थूल परिणामों को जोड़ता है।

बृहदारण्यक उपनिषद् (४.४.५) का विधान है:

“यथा कृतयः तेन भवति” – जो जैसा करता है, वैसा बनता है।

लेकिन कर्म तत्काल फल नहीं देता; अदृष्ट नामक सूक्ष्म कारक में उसका बीज रूप में संचयन होता है।

यह अदृष्ट-सूत्र आधुनिक भौतिकी में ऊर्जा-स्थितियों या संभावना-फंक्शन (Probability Distribution) के समतुल्य है।

 

✓•२.२ ग्रह के “बल” का अर्थ:

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (अध्याय ३) कहता है कि ग्रह फल देते हैं, किन्तु वे कारण नहीं, सूचक हैं:

“ग्रहाणाम् फलदातृत्वम्”

अर्थात् ग्रह किसी फल को उत्पन्न नहीं करते, बल्कि कर्म-ऊर्जा की स्थिति का संकेत देते हैं।

•यही संकेत-आधारित क्रिया क्वांटम टनलिंग की तरह “सूक्ष्म” घटना को “स्थूल” परिणाम देती है।

 

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✓•३. क्वांटम टनलिंग: सिद्धांत और वैज्ञानिक आधार क्वांटम टनलिंग वह घटना है जिसमें:

•१. कण ऊर्जा-रुद्ध बाधा (potential barrier) को,

•२. पर्याप्त ऊर्जा न होते हुए भी,

•३. संभाव्यता-तरंग (wave function) के कारण पार कर सकता है।

 

•यानि—भौतिक शास्त्र के अनुसार असंभव घटना, क्वांटम सिद्धांत के अनुसार संभव हो जाती है।

 

✓•३.१ वेव-फंक्शन की भूमिका:

क्वांटम कण एक बिंदु-वस्तु नहीं, बल्कि “संभाव्यता तरंग” है। बाधा के उस पार इस तरंग का कुछ अंश (wave amplitude) मौजूद रहता है; यही उस कण के “टनल” करने की संभावना का आधार है।

 

✓•३.२ बाधा का अर्थ:

क्वांटम में बाधा का अर्थ है—ऊर्जा का स्थूल अवरोध।

ज्योतिष में बाधा का अर्थ है—कर्म, दशाएँ, दोष, ग्रह-दृष्टि, अनुकूल-अननुकूल गुण, आदि।

दोनों में—“असंभव घटना” को “संभव” बनाने का माध्यम सूक्ष्म स्तर है।

 

✓•४. क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष का तुलनात्मक विश्लेषण:

 

✓•४.१ बाधाएँ, ऊर्जाएँ और सूक्ष्म मार्ग:

 

•क्वांटम:

बाधा = Potential Barrier.

कण ऊर्जा कम है, फिर भी पार कर लेता है।

कारण = वेव फंक्शन का बाधा के पार भी अस्तित्व।

 

•ज्योतिष:

बाधा = नकारात्मक दशा, अशुभ ग्रह-दृष्टि, दुष्ट-भव, प्रतिकूल नक्षत्र।

व्यक्ति कमजोर स्थिति में भी सफलता प्राप्त कर लेता है।

 

•कारण = सूक्ष्म कर्म-सूत्र और “अदृष्ट-ऊर्जा” का समर्थन।

 

यहाँ “अनपेक्षित सफलता” क्वांटम टनलिंग के समान है।

 

✓•५. दशा–गोचर और टनलिंग: संभाव्यता चरम (Probabilistic Peaks)

क्वांटम टनलिंग तभी अधिक होता है जब:

वेव फंक्शन का संभाव्यता-घनत्व बाधा के पास अधिक हो।

कण की ऊर्जा बाधा की ऊँचाई के करीब हो।

 

ठीक वैसे ही ज्योतिषीय घटनाएँ (अचानक लाभ, बीमारी से चमत्कारिक उन्मुक्ति, असंभव मिलन, दुर्घटना, अवसर, मोक्षानुभूति) तब अधिक घटित होती हैं जब:

व्यक्ति की विंशोत्तरी दशा किसी शुभ ग्रह की ओर बढ़ रही हो।

गोचर बाधाओं को “बाईपास” कर रहा हो।

नक्षत्रीय ऊर्जा (विशेषतः अश्विनी, पुष्य, मूल, रेवती) बाधा पार करने की क्षमता बढ़ाती हो।

यह संभाव्यता-चरम (probability peak) का सिद्धांत क्वांटम टनलिंग से पूर्णतः मेल खाता है।

 

✓•६. नॉन-लोकैलिटी (Non-locality) और ज्योतिष का कर्म-क्षेत्र:

क्वांटम टनलिंग तभी संभव है जब कण का वेव फंक्शन बाधा के पार भी फैला हो। यह सिद्धांत दर्शाता है कि:

•कण केवल अपने स्थान पर नहीं रहता।

•वह एक क्षेत्र (field) में वितरित होता है।

 

•ज्योतिष मानता है कि जीव का कर्म-क्षेत्र भी “स्थान” आधारित नहीं है:

 

•कठोपनिषद् (२.३.९) में आत्मा को “न संदृशे तिष्ठति रूपमस्य

न चक्षुषा पश्यति कश्चैनम्।

हृदयमनीषा मनसाऽभिक्लृप्तो

य एतद्विदुरमृतस्ते भवन्ति ॥” कहा गया है।

 

•गीता (१३.३२)—चेतना सम्पूर्ण क्षेत्र में व्याप्त है।

 

•ग्रह “सूक्ष्म दृष्टि” से कार्य करते हैं, दूरी कोई बाधा नहीं।

 

•क्वांटम नॉन-लोकैलिटी और कर्म-क्षेत्र में समानता:

 

•आधुनिक क्वांटम वैदिक ज्योतिष:

कण दूरी के परे असर डाल सकता है ग्रह सूक्ष्म दृष्टि से कर्म को प्रकट करते हैं

संभाव्यता क्षेत्र बाधा पार कर लेता है अदृष्ट-सूत्र बाधाएँ तोड़कर परिणाम देता है

अवलोकन से घटना “स्थिर” होती है दशा–गोचर से संभावना फलित होती है

 

✓•७. सूक्ष्म ऊर्जा-स्तर और जन्मपत्री: टनलिंग का मानवीय समकक्ष

क्वांटम टनलिंग बताता है कि ऊर्जा-स्तर की छोटी-सी वृद्धि भी कण के व्यवहार को बदल सकती है।

 

•ज्योतिष में:

जन्म का एक मिनट बदल जाने से लग्न बदल सकता है।

दशा के कुछ दिन घटनाओं की दिशा बदल देते हैं।

नक्षत्र और पाद व्यक्ति की स्वाभाविक “ऊर्जा-तरंग” निर्धारित करते हैं।

यह अत्यधिक संवेदनशीलता क्वांटम व्यवहार के समान है।

 

•छोटा परिवर्तन → विशाल परिणाम

यही क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष का साझा सिद्धांत है।

 

✓•८. वैदिक सिद्धांतों में क्वांटम टनलिंग का संकेत

 

✓•८.१ योगवासिष्ठ:

 

योगवासिष्ठ में सूक्ष्म जगत की क्षमताओं का अत्यंत विस्तृत वर्णन है:

•चेतना बाधाओं को “भेदन” कर सकती है।

•सूक्ष्म देह समय–स्थान से स्वतंत्र होकर गमन कर सकती है।

•कारण–कार्य के स्थूल नियम चेतना द्वारा “अतिक्रमित” किए जा सकते हैं।

•यह “सूक्ष्म भेदन” क्वांटम टनलिंग का वैदिक समकक्ष है।

 

✓•८.२ सांख्य दर्शन:

 

•सांख्य कहता है:

•गुणों का परिवर्तन सूक्ष्म स्तर पर तत्काल होता है।

•स्थूल परिणाम बाद में उत्पन्न होते हैं।

 

•टनलिंग में भी:

•निर्णय सूक्ष्म स्तर पर होता है।

•कण स्थूल बाधा को पार कर लेता है।

 

✓•८.३ उपनिषदों की “सूक्ष्म-गति”

 

•छांदोग्य उपनिषद (६.८.७):

“सूक्ष्मं तु तद् अव्यक्तम्” — वास्तविक कारण सूक्ष्म होता है।

क्वांटम टनलिंग इसी सूक्ष्म कारण का उदाहरण है।

 

✓•८.४ पाराशरी ग्रंथ:

•पाराशर गतिसूत्र की बात करते हैं:

•शुभ ग्रह बाधाओं को काटते हैं।

•पाप ग्रह स्थूल से सूक्ष्म में अवरोध उत्पन्न करते हैं।

•लग्न और चन्द्र की शक्ति बाधाओं को “भेदने” की क्षमता बढ़ाती है।

•यह “अवरोध-भेदन” टनलिंग के समान है।

 

✓•९. जीवन में “टनलिंग प्रभाव”: ज्योतिषीय उदाहरण:

 

✓•९.१ असंभव सफलता:

व्यक्ति अत्यधिक विपरीत परिस्थितियों में भी:

•प्रतियोगी परीक्षा पास कर लेता है,

•उपचार असंभव होते हुए भी बच जाता है,

•व्यापार असंभव होते हुए भी चल पड़ता है।

•ज्योतिष इसे शुभ दशा–गोचर–नक्षत्रीय प्रभाव कहता है।

विज्ञान इसे क्वांटम टनलिंग जैसा “barrier bypass” कह सकता है।

 

✓•९.२ अचानक विघटन या हानि:

कभी-कभी स्थिर, सफल जीवन में अचानक:

•भारी कर्ज

•परिवार में टूटन

•स्वास्थ्य संकट

•निर्णय त्रुटि

•यह भी बाधा के भीतर टनलिंग जैसा “sudden shift” है।

 

✓•९.३ साधना और आध्यात्मिक उन्नति:

साधक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद:

•कुंडलिनी जागरण,

•समाधि-अनुभव,

•अध्यात्व-प्राप्ति

कर लेता है।

यह “चेतना का बाधाओं को भेदना” है—क्वांटम टनलिंग का आध्यात्मिक समकक्ष।

 

✓•१०. ग्रह-ऊर्जा, नक्षत्र और क्वांटम टनलिंग का वैज्ञानिक मॉडल:

ज्योतिषीय ऊर्जा-क्षेत्रों में निम्न तत्व टनलिंग जैसी घटना उत्पन्न करते हैं:

•१. अश्विनी – गति और बाधा-भेदन की ऊर्जा।

•२. मृगशीर्ष – सूक्ष्म-मार्ग और अंतःगति।

•३. आर्द्रा – उथल-पुथल और अचानक परिवर्तन।

•४. पूर्वाषाढ़ा – दृढ़ता और breakthrough.

•५. धनिष्ठा – उच्च ऊर्जा स्तर।

•६. शतभिषा – सूक्ष्म चिकित्सा और molecular स्तर पर healing.

 

•यह नक्षत्रीय गुण मानव-ऊर्जा-क्षेत्र को क्वांटम-जैसी संवेदनशीलता प्रदान करते हैं।

 

✓•११. क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष का दार्शनिक समापन:

क्वांटम टनलिंग यह सिद्ध करता है कि:

•ब्रह्माण्ड के नियम यांत्रिक नहीं, संभाव्य हैं।

•बाधाएँ पूर्ण नहीं, सापेक्षिक हैं।

•सूक्ष्म स्तर में परिवर्तन स्थूल जगत को मोड़ सकता है।

 

•ज्योतिष यह सिद्ध करता है कि:

•कर्मसूत्र अदृश्य है, फल दृश्य।

•दशाएँ बाधाएँ तोड़ सकती हैं।

•ग्रह स्थिति सूक्ष्म ऊर्जा-स्तरों की व्याख्या करती है।

•अतः दोनों सिद्धांत एक ही सत्य के भिन्न प्रतिरूप हैं:

•सूक्ष्म ऊर्जा—स्थूल बाधा को भेद सकती है।

•यह क्वांटम टनलिंग का वैज्ञानिक रूप है, वही ज्योतिष में दशा–गोचर और अदृष्ट का फलस्वरूप है।

 

✓•१२. निष्कर्ष:

इस शोधप्रबंध से निम्न निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने आते हैं:

•१. क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष दोनों मानते हैं कि स्थूल बाधाएँ अंतिम नहीं हैं; सूक्ष्म ऊर्जा उन्हें पार कर सकती है।

•२. वेव-फंक्शन की संभाव्यता और ज्योतिषीय फल-सूत्र की संभाव्यता में गहरा साम्य है।

•३. उपनिषद, सांख्य, योगवासिष्ठ और पाराशर-सिद्धांत टनलिंग जैसी सूक्ष्म-भेदन घटनाओं का वैदिक आधार प्रस्तुत करते हैं।

•४. ग्रह-दशाएँ टनलिंग जैसी sudden breakthroughs या sudden failures उत्पन्न करती हैं।

•५. जीवन की अनेक “असंभव” घटनाएँ—सकारात्मक और नकारात्मक—क्वांटम-जैसे सूक्ष्म ऊर्जा-मार्गों का परिणाम हैं।

•६. आधुनिक विज्ञान और प्राचीन ज्योतिष—दोनों इस निष्कर्ष पर आधारित हैं कि “सूक्ष्म स्तर ब्रह्माण्ड के कार्य का वास्तविक आधार है।”

अतः क्वांटम टनलिंग और ज्योतिष परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक ही ब्रह्माण्डीय नियम की दो भाषाएँ हैं—

एक वैज्ञानिक भाषा में, दूसरी वैदिक-संकेत भाषा में।

 



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