भारत में भी व्यक्तिवादी सम्प्रदायों ने सनातन की निन्दा की है, पर उसी ज्ञान को थोड़े शब्द बदल कर अपना...
असुरों ने भी समय समय पर अपने स्वार्थ या वासना पूर्ति के लिए वेद शब्दों के भिन्न अर्थ किये, जैसे...
सनातन धर्म में नास्तिक उसे कहते हैं जो कहता है, न अन्यत् अस्ति = जो मैं कहता हूं वही सही...
कालपुरुष व्यापक है, आदि है और यज्ञ पुरुष सादि है, सीमित है।...
गीता में पहले महर्षियों तथा मनु आदि से सृष्टि का आरम्भ कहा है तथा विभिन्न प्रकार की सृष्टियों में सर्वश्रेष्ठ...
होलिका दहन के समय अग्निदेवता का तत्त्व वहाँ सक्रिय रहता है और यह तत्त्व दूसरे दिन भी कार्यरत रहता है।...
यह मंत्र साधक को ऊर्ध्वगामी बनाता है, शान्ति और चिदानन्द की स्थिति तक ले जाता है।...
हम सबकी यात्रा उसी अनंत की ओर है— उसी देवालय की ओर। और उस पथ पर आरंभ में *मंदिर* भी...
जब “भारत” शब्द किसी व्यक्ति के अपत्य या वंश के अर्थ में प्रयुक्त हुआ, तब वह “भारतः” (पुंलिङ्ग) या “भारती”...
‘प्रत्येक जीव में शिवत्व (आत्मतत्त्व) विद्यमान है और वह चैतन्यरूप है—वही परम शिव है।...