हम सबकी यात्रा उसी अनंत की ओर है— उसी देवालय की ओर। और उस पथ पर आरंभ में *मंदिर* भी...
जब “भारत” शब्द किसी व्यक्ति के अपत्य या वंश के अर्थ में प्रयुक्त हुआ, तब वह “भारतः” (पुंलिङ्ग) या “भारती”...
‘प्रत्येक जीव में शिवत्व (आत्मतत्त्व) विद्यमान है और वह चैतन्यरूप है—वही परम शिव है।...
पञ्चाक्षरमन्त्र (नमः शिवाय) से पहले ॐकार जोड़ देने से यह षडक्षर मन्त्र कहलाने लगता है। यह षडक्षर होते हुए भी...
दूसरे शब्दों में कहा जाय तो 'अ' आदिम अक्षर है। अन्य सत्र अक्षरों में 'अ' है।...
दत्त परमात्मा अपनी योगमाया से सोलह अंशों से बने (उन्नीस इंद्रियाँ और पंचमहाभूत) विराट पुरुषरूप विश्व की रचना करते हैं।...
भौगोलिक रूप में भारत का मस्तिष्क स्थान हिमालय का त्रिविष्टप् (तिब्बत) है। इसके ३ विष्टप् (या विटप = वृक्ष) हैं।...
अग्नि देवताओं तक हवि पहुँचाता है। जैसे मानव पुरोहित यजमान और देवताओं के बीच सेतु है, वैसे ही सूक्ष्म स्तर पर अग्नि...
काल की एक अन्य गणना है कि किसी निर्दिष्ट समय से अब तक कितना समय बीता है। चन्द्र मन को...
भारतीय तांत्रिक परम्परा भूत-प्रेत-पिशाच-वेताल-डाकिनी-शाकिनी-ग्रह-ऊर्जा आदि सभी प्रकार की अदृश्य शक्तियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत करती है। तंत्र-शास्त्र में इन्हें ऊर्जा-तत्त्व, सूक्ष्म-वायवीय...