वेदान्त-दर्शन में कहा गया है कि देवता एक ही समय अनेक स्थानों में भिन्न-भिन्न रूप से प्रकट होकर अपनी...
बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में जिन अनेक वर्गों ने भूमिका निभाई, उनमें ब्राह्मणों का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा।...
यह विषय हम सीधे-सीधे कुण्डलिनी साधना से जोड़ रहे है। जो भी व्यक्ति साधनाओं में रूचि रखते हैं। वो आज्ञा...
न्यास का अर्थ है स्थापन। बाहर और भीतर के प्रत्येक अङ्ग में इष्टदेवता और मन्त्र का स्थापन ही न्यास है।...
श्वेत मकर पर विराजित, शुभ्रवर्ण वाली, तीन नेत्रों वाली, दो हाथों में भरे हुए कलश तथा दो हाथों में सुन्दर...
शेषनाग के शरीर के मध्य में नौ कुंण्डलियां होती है ऊपरी शीर्ष पर चंद्रमा होता है इस चंद्रमा के नीचे...
संध्या कर्म के निश्चित काल का लोप हो जाने पर भी प्रायश्चित्त करना पड़ता है, फिर कर्म का लोप होने...
सिद्धार्थ बुद्ध के पूर्व ७ मुख्य बुद्ध थे, जिनका वर्णन सप्ततथागत में है-विपश्यि, शिखि, विश्वभू, क्रकुच्छन्द, कनकमुनि, कश्यप (द्वितीय), गौतम।...
यज्ञ चक्र चलने से अन्न सम्पत्ति अक्षय रहती है तथा समाज या सभ्यता सनातन रहती है। अतः अन्न उत्पादन के...
एक ही तत्त्व उत्पत्ति, स्थिति और संहार के लिये ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीन रूपों में आया है। इस...