पृथ्वी एवं उसके परिक्रमण-पथ द्वारा आकाश पर बने प्रक्षेप की संज्ञा “विष्णु” है। इस प्रक्षेप के अनेक रूप हैं किन्तु...
यह प्रश्न ही भ्रामक है क्योंकि वेदों में किसी भी प्रकार की अश्लीलता नहीं है। संस्कृत भाषा में यौगिक,रूढ़ि एवं...
इस संसार वृक्ष का मूल ऊर्ध्व कहा गया है जो सच्चिदानन्द ब्रह्म है। वृक्ष को आधार तथा पोषण अपने ही...
हर गुरु का यही उद्देश्य है कि शिष्य उससे आगे निकले तथा उनकी भूलों का भी सुधार करें।...
तैत्तिरीय उपनिषद् ने ५ प्रकार के अर्थ कहे हैं। सभी अर्थों के बाद भी प्रथम मन्त्र की पूर्ण व्याख्या नहीं...
राजकीय केन्द्र काशी के राजा जैसे दिवोदास भोज थे, और इस क्षेत्र की भाषा भोजपुरी है। नक्शा बनाने के लिये...
इन्द्र ने असुरों को मारने के पहले ८८,००० शालावृक विद्वानों को मारा, जो भारत में रहते थे, किन्तु असुरों का...
स्थूल विश्व से सूक्ष्म का अनुमान अतिरोहण है-यदन्नेनातिरोहति (पुरुष सूक्त, २) नीचे से उठने की सभी क्रियायें रोहित हैं-भूमि में...
पारिवारिक विवाद, असहयोग, तलाक ,हड़ताल ,भ्रष्टाचार, से ये हिन्दू समाज बाहर आता दिखाई नही देता क्योकि कर्तव्य बोध समाप्त हो...
आधुनिक विज्ञान में २ सर्पाकार भुजायें कहीं जाती हैं। इनके खण्डों को मिला कर आकाशगंगा की ७ धारायें कही गयीं...